मथुरा/वृंदावन। गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन में दो दिवसीय श्रीमद्भगवद् गीता जयंती महोत्सव भक्ति वेदांत रिसर्च सेंटर पुणे के संयुक्त तत्वावधान में मनाया गया।
प्रथम दिन गीता जयंती महोत्सव का शुभारंभ गीता विद्वान ब्रह्मबोधि जी ( पूर्व डीजीपी त्रिपुरा) ने श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रमुख वक्ता श्रीवत्स गोस्वामी जी ने ब्रज भाषा में बोलते हुये गीता पर प्रकाश डाला। आचार्य बद्रीश जी ने कहा कि गीता के संदेश अपनाये तो सभी बाधाऐं दूर हो सकती है। पं. रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि गीता मंे सभी समस्याओं के निदान का भंडार है।
भक्ति वेदांत रिसर्च सेंटर पुणे के भूषण कुमार चौधरी ने संस्था द्वारा पुणे व आसपास में चलाये जा रहे गीता के प्रचार-प्रसार कार्यक्रम से अवगत कराया। पुणे से आयी डाॅ. रेवती कथारे ने गीता पर शोध पर प्रकाश डाला। प्रथम दिन डाॅ. देवेद्र सिंह, विजय मिश्र, रितेश पाण्डेय, विभा गोस्वामी, राजेश शुक्ला, श्रीमती शारदा मिश्रा आदि ने विचार व्यक्त किये। संचालन डाॅ. रामदत्त मिश्र ने किया। अतिथि विद्वान वक्ताओं का सम्मान व परिचय गीता शोध संस्थान वृंदावन की समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया।
गीता व रासलीला प्रशिक्षण ले रहे बच्चों द्वारा गीता की संगीतमय आरती व गीता के श्लोकों पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
महोत्सव में दूसरे व अंतिम दिन उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद मथुरा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एस.बी.सिंह ने कहा कि जो कर्म है वही सबसे बड़ा धर्म है। गीता हमें यही सिखाती है। गीता सांसारिक मुक्ति का मार्ग है। यह हर वर्ग के लोगों के लिए लिखी गयी है। गीता से हमें यही संदेश मिलता है कि ज्ञान का सही उपयोग हो और आडम्बरों से हम दूर रहें। श्रीरंगलक्ष्मी संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य अनिलानंद जी, गीता विद्वान गंगाधर पाठक, हंसराज काॅलेज दिल्ली के प्रो. नित्यगोपाल शर्मा, श्रीमती ज्योत्सना शर्मा
गौरांग इंस्टीटयूट फार वैदिक एजूकेशन GIVE संस्था के संत अकाम मुक्ति दास, प्राचार्य डा के.के. शर्मा और मंजू गौड़ प्राचार्य ने भी गीता के भक्ति, कर्म, ज्ञान पर अलग-अलग दृष्टिकोण से विचार व्यक्त किये। महोत्सव के अंत में ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डाॅ. उमेश चंद्र शर्मा ने गीता जयंती मनाये जाने के औचित्य पर प्रकाश डाला। निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना द्वारा संस्थान में चलाये जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी। समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार द्वारा गीता विद्वानों का पटुका पहना कर सम्मान किया गया और सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
More Stories
शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में गीता शोध संस्थान के कलाकारों का महारास,चंद्रसरोवर के घाटों पर हजारों दीप जलाए, रही आकर्षक छटा
सांझी महोत्सव-2024 में सांझी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संगम
गीता शोध संस्थान के ओएटी पर ‘श्रीकृष्ण प्राकट्य लीला’ और ‘गोपी करे पुकार’ का भव्य मंचन,श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 2024 में ओपन एयर थिएटर संस्थान के प्रशिक्षु बच्चों की शानदार प्रस्तुतियां